Saturday, May 23, 2020


रईसी नोकरी छोड़ दूध बेच रहे हैं ये युवा और कमाई लाखो में.......



एक ऎसा युवा जिसने लाखो का पैकेज ठुकरा कर बेचने लगा दूध.... अब कमा रहा है लाखो रुपये और लाखों कमाने के साथ लोगों के सेहत का रख रहे हैं ध्यान...


आज मैं आपको एक ऎसे युवा के बारे में बात करने जा रहे हैं जिन्होंने मल्टीनेशनल कम्पनी से लाखों की नोकरी ठुकरा कर अपने दूध बेचने का काम शुरू किया....
केसर वाला स्वादिष्ट दूध 


मैं बात करने जा रहा हूं हरियाणा के रोहतक जिले में एक छोटे से गांव में रहने वाले प्रदीप श्योराण जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद लंबे समय तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया जहां पर सालाना पैकेज लाखो रुपये में था.... पर प्रदीप का मन अभी भी उस नोकरी में नहीं लग रहा था... इसलिए उन्होंने उस नोकरी को ठुकरा कर अपने गाँव आ गए.... और अपने गाँव आपके की एक नई शुरुआत "बागड़ी मिल्क पार्लर" उन्होंने अपने घर में पाली गई भारतीय नस्ल की गायों के दूध को गर्म कर उसमें स्वादिष्ट और पौष्टिक चीजें मिलाकर वो बाजार और मेलों में बेचते लगे और धीरे धीरे उनका दूध और दूध से बने अनेक आइटम लोग इतना पसंद करने लगे कि उनका कारोबार आगे बढ़ता गया। प्रदीप श्योराण कहते हैं कि किसान को अगर कमाई करनी है तो उसे  बिजनेसमैन बनना पड़ेगा। मैंने सीधे दूध को बेचने के बजाए उसे गर्म कर लोगों को पिलाना शुरु किया। अगर ऎसे ही थोक में बेचता तो 40 रुपये में जाता लेकिन गर्म करके लोगों को सीधा बेचने पर 100 रुपए लीटर बिक रहा है।

प्रदीप श्योरण के बारे में.....

स्वादिष्ट दूध पीने के लिए आए लोग 


प्रदीप श्योरण हरियाणा के रोहतक में चरखी दादरी के मांडी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने हिसार की गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से एमबीए की बढ़ाई पूरी की उसके बाद  उन्होंने हैवेल्स, बर्जर पेंट जैसी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम किया और एक दिन नौकरी को बाय बाय बोलकर वो अपने गांव लौटे और देसी गायों का दूध बेचना शुरु कर दिया। प्रदीप के मुताबिक पिछले 3-4 महीनों में ही उनके स्टार्टअप को उम्मीद से ज्यादा सराहना मिली है।

प्रदीप बताते हैं, "कॉरपोरेट में काम करते हुए महसूस हुआ कि क्यों न खुद का काम किया जाए। खेती और पशुपालन ऐसे दो व्यवसाय हैं, जिनमे अपार संभावनाएं हैं और गांव में रहने के कारण बचपन से इससे जुड़ा भी रहा हूं। अभी तक किसान अपने पशुओ का दूध थोक में बेचता है, जो सस्ता जाता है। लेकिन बाद में वही दूध जब दही या पनीर और घी बनकर आता है तो काफी महंगा मिलता है। मैंने इसका उल्टा किया मैं अपने उत्पाद फुटकर में बेचता हूं और बाजार से जो खरीदना होता है उसे थोक में खरीदता है। जिससे वो सस्ती मिले।"


प्रदीप बताते हैं, "ये बिजनेस का अनुभव था। किसान अगर कारोबारी बनता है और अपनी चीजें सीधे उपभोक्ता तक पहुंचाता है तो दोनों को फायदा है। उपभोक्ता को शुद्ध और फ्रेश चीजें मिलेगीं तो किसान को भी अच्छा फायदा होगा।"
रोहतक में बागड़ी मिल्क पार्लर पांच जगहों पर रोजाना दूध की बिक्री करता है। दूध के साथ देसी गायों का घी और कुछ दूसरे उत्पादों की भी बिक्री शुरु की है। प्रदीप ऐसे छोटे स्टार्टअप के फायदे कुछ ऐसे समझाते हैं। "मैं सिर्फ पांच जगहों पर दूध पिला रहा हूं। मिट्टी के कुल्हड़ में देता हूं। ये सेहत के लिए अच्छा है। मिट्टी के कुल्हड़ों से कोई कचरा नहीं होता। कुम्हारों को भी रोजगार मिलता है। अभी मैंने 4 लोगों को प्रत्यक्ष और 3 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार दिया है। अगर दूसरे किसान भी ऐसा करेंगे तो किसान, उसके साथ काम करने वाले लोगों, शहर तक सामान पहुंचाने वाले पढ़े लिखे लड़कों सबको रोजगार मिलेगा।"

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